Tuesday, 21 January 2014

और बज गया कल्लन मियां का बैंड



गोरे चिट्टे, गोल-मटोल। दिल के सच्चे, घर के छोटे बच्चे, पर दिमाग से तेज। घर की पूरी जिम्मेदारी, पर जहन में खुद्दारी। अच्छा खासा हैं कमाते, अपने ऊपर कुछ नहीं लुटाते। अपना पेट जरूर काटते, लेकिन पूरा घर हैं चलाते। करते खूब कमाई और लोगों की भी करते भलाई। अपनी जवानी को कुछ ऐसे ही जिया, ये हैं हमारे कल्लन मियां। लेकिन एक था मन में गम, इतनी भलाई भी काम न आई, नहीं मिल रही थी जो इनको लुगाई। कल्लन मियां की कहानी, सुनिए मेरी जुबानी।
कुछ साल पहले की थी बात, कंधों में कर्ज का बोझ लिए कल्लन मियां दिल्ली के पास दादरी के एक कॉलेज में अपना ग्रेजुएशन करके कंप्यूटर की पढ़ाई करने आए। मेहनती और लग्गू। सीधे-सादे कल्लन मियां के पापा ने उन्हें बड़ी हसरतों से यहां भेजा था। इस बात को कल्लन मियां भी अच्छे से समझते थे। आते ही लग गए पढ़ाई में। कम खर्च में उन्होंने दिन काटने शुरू किए। दिल में कामयाब होने का सपना, कुछ कर दिखाने का जज्बा और दिमाग में पूरे घर की जिम्मेदारी का बोझ। कल्लन मियां ने कंप्यूटर की तीन साल की पढ़ाई के एक-एक साल बड़ी शिद्दत से पूरे किए। अब कल्लन मियां हो गए पोस्ट ग्रेजुएट। 
लेकिन हमारे मुल्क में तो ऐसे कई पोस्ट ग्रेजुएट, सड़कों की धूल फांक रहे थे। पर कल्लन मियां उनमें शामिल नहीं होना चाहते थे। पहली नौकरी मिली एक छोटी सी कंपनी में। तन्ख्वाह के नाम पर चिल्लर। पर कल्लन मियां पीछे नहीं हटे। नौटरी के लिए डटे और दिल लगाकर काम करना शुरू किया। धीमे-धीमे मेहनत रंग लाई। दूसरी कंपनी से अच्छा ऑफर मिल गया। कमाई भी ठीक-ठाक होने लगी।
पर घर और पढ़ाई के लिए कर्ज का बोझ। कल्लन मियां ने दिमाग लगाया। अपने पर खर्च कम करके सारे कर्जों को निपटाया। पिता जी का सपना किया पूरा, खुद की चाहतों को पीछे ही छोड़ा। अब इस बीच तरक्की की गाड़ी भी पटरी पर दौड़ी, कामयाबी भी मिली और कमाई भी हो गई थोड़ी। घर को घर बनाया, मां-पिता जी के दिल को हंसाया।
पर अब आई अपना घर बसाने की बारी, यहीं हो गई उनकी तकदीर बेचारी। उम्र की सूरज चढ़ता जा रहा था, पर अपना घर बसाने का कोई रास्ता न नजर आ रहा था। कई लड़कियां देखीं, कुछ ने उनको और कुछ को उन्होंने रिजेक्ट कर डाला। अब समझ न आए कल्लन मियां को कैसे बजेगी उनके घर में शहनाई, ऐसा लगा कि दुनिया की सबसे बड़ी आफत है उन पर आई।
ऑफिस में काम करने वाली लड़कियों को देखकर दिल देता आवाज, क्या इन्हीं में से किसी का पकड़े लें हाथ। पर घर और समाज की आई याद। अब क्या करें। क्या न करें। घर वाले भी परेशान, कल्लन मियां के पिता जी भी हैरान। हर जगह तलाश। कल्लन मियां के लिए कोई तो मिले खास। एक बार तो हुआ कुछ ऐसा, कल्लन मियां को आई एक लड़की पसंद, लड़की को भी लगा कि थाम ले कल्लन मियां का दामन। पर बनते बनते रह गई बात, फिर वही ढाक के तीन पात। 
अब तो कल्लन मियां और घर वाले टेंशन में। लेकिन कुछ दिन बाद उम्मीद की किरण खिली। अब लगा कि जैसे बात बन गई। कल्लन मियां पुरानी कड़वी यादों के साथ ही गए एक लड़की को देखने। बाते हुईं, आंखे भी चार हुईं। इस बार तो बॉल भी स्टेडियम के पार हुई। कल्लन मियां के मन के बागों में फूल खिल गए और दो दिल एक दूसरे के हो गए। इस बार न हो जाए कोई खेल, तो जल्दी-जल्दी कर ली सगाई। फरवरी की डेट में फिक्स कर ली शादी। अब कल्लन मियां भी अपने भाइयों के लिए लाएंगे भाभी। खत्म हुई कल्लन मियां की टेंशन, मिल गया लाइफ पार्टनर अब हो गए टनटनाटन। फरवरी में हैं उनकी शादी, होगा धूमधड़क्का, होगा डांस, और गाना होगा स्टेज पर बैठे हैं विद बीवी, बजाए हाए कल्लन मियां सीटी। 
दिल से दुआ है हमारी, कल्लन मियां की जिंदगी में भर जाएं शुशियां सारी।

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