भइया का बताएं बड़ी राहे ससुर जी
से आस। हम अपनी एक इच्छा पूरी करने गए राहें उनके पास। पर का बताई उन्हें
हमारी नहीं हमरी सास की ज्यादा समझ आई बात। और हमरी टूट गई आस। ऐसा ही कुछ
बड़बड़ाते, अपना मुंह सिकोड़ते हुए अन्नू भइया तखत से उठे और चलते बने।
उनके दोस्तों को समझ नहीं आया कि आखिर अन्नू भइया इतना भुन्नए हुए क्यों
हैं। क्यों अपने ससुरे को खरी-खोटी सुना रहे हैं। पर उनके सबसे करीबी मित्र
को अन्नू भइया के दिल मे हुई बेचैनी की वजह की हल्की सी भनक थी। वो पीछे
से उनके साथ हो लिया। तेज कदमों के साथ अन्नू भइया के कदमों से कदम मिलया।
हाथ पकड़ कर बोला अमा यार छोड़ो ससुरे को। आगे कभी देख लेना। अन्नू भइया की
बेचैनी अपने मित्र की इस बात पर गुस्से में तब्दील हो गई। बोले अबे
तुम्हारे साथ ऐसा हो तब पता चलेगा। साला बचपन की मुराद आगे चलकर सिर्फ याद
ही बनकर रह जाएगी। जब उन्होंने अपने गुस्से का इजहार कुछ इस कदर किया तो वो
पक्का हो गया कि आखिर अन्नू भइया क्यों बिफरे हुए हैं। उनका मित्र भी
पुराने दिनों को याद करने लगा, जब वो और अन्नू भइया नेकर पहनने की उम्र में
थे।
गली के छोर पर खड़े होकर अन्नू भइया सामने वाले अंकल जी की बुलेट को
निहारा करते थे। बस एक ही शौक उसकी गद्दी पर बैठकर उसके हैंडल को इधर उधर
घुमाएं, मुंह से फट-फट-फट की आवाज निकालें। मानो लंबी सैर पर निकल गए हों।
पर अंकल जी कि अपनी फटफटी के पास किसी को फटकने न दें। बेचारे अन्नू भइया
के मन में बुलेट पर बैठने की तमन्ना कसक बनकर रह गई, रोज बस मन मसोस कर रहे
जाते वो। थोडा बड़े हुए कॉलेज जाने लगे। पिता जी का बिजनेस चौपट हो गया तो
एडमीशन ही मिल गया यही बहुत। कॉलेज जाने के लिए मिली साइकिल। खैर अन्नू
भइया पैडल मारते हुए पहुंच जाते कॉलेज। अब ये लो। कॉलेज में ढेरो नेता।
अपना रुआब झाड़ने के लिए कुछ के पास खुद की तो कुछ की मांगे की, बुलेट तो
थी। अन्नू भइया रोज उन लोगों को देखते, मन करता उनसे दोस्ती कर लें। शायद
बुलेट पर बैठने का मौका मिल जाए। पर सीधे-सादे अन्नू भइया ने उनसे दूर रहने
में ही भलाई समझी। पूरे तन मन से कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। नौकरी के लिए
इंटरव्यू दिया, सेलेक्ट हो गए। धीमे-धीमे तरक्की भी हुई। पर घर का कर्जा
उतारते-उतारते ही समय का सूरज काफी चढ़ गया। अपने शौक को हकीकत में न बदल
पाए। अरे वही अपनी फटफटी में फुर्र से सड़कों पर फर्राटा भरने का। इस बीच
उनके एक चाचा ने उनके मन को परखा। बोले अन्नू तुम कर लो पूरा अपना शौक, कुछ
फाइनेंस हम कर देंगे। बोले चलो मेरे साथ, दिला लाएं फटफटी। पर अन्नू भइया
बने थोड़ा स्मार्ट। दिमाग लगा दिया। बोले चाचा नहीं लेलेंगे बाद में। पर
अन्नू भइया के दिमाग में चल रही थी कोई और योजना।
अन्नू भइया ने मन ही मन में तय किया कि शादी में पक्का बुलेट की
डिमांड रखेंगे। भइया की शादी तय हो गई। सब बात हो गई, पिता जी ने भी अन्नू
भइया की मन की बात उनके ससुर साहेब के सामने रखी। ससुर साहेब ने भी बोला
दामाद जी की इच्छा सिर आंखों पर।
अन्नू भइया खुशी के मारे गिल-गिल कंपट हो गए। मन ही मन अपने ख्वाब को
सच बनने का दिन करीब आने के बारे में सोचने लगे। इस बीच अपनी होने वाली
पत्नी से बात भी शुरू हो गई।
एक दिन बातो-बातों में होने वाली
पत्नी ने बताया कि पापा कार के शोरूम से होकर आए। बोली और समझाया कि शादी
के बाद कार से घूमने का मजा ही कुछ और आएगा।
अन्नू भइया को समझ न आए कि ये कैसे हो गया। साला जब बात उनकी फटफटी
यानी बुलेट की हुई तो ये कार से कहां बेकार में घुस गई। तुरंत फोन काटा और
अपने पिता जी के कमरे की तरफ पैर बढ़ाया। पिता के पास पहुंचकर बोले, ये
क्या पापा ससुर जी तो अपनी बात से पलट रहे। बुलेट की जगह कार देने को कह
रहे। पिता जी को भी ये बात जंच गई, बुलेट की जगह कार की बात सुनकर उनकी भी
छाती फूल गई। बोले इसमें क्या बुरा भइया, उस फटफटी की जगह कार वाह क्या बात
है।
अब अन्नू भइया और टेंशन में। तुरंत अपनी होने वाली पत्नी को फोन
लगाया। बोले ये कार की बात कहां से आई, हमने तो फटफटी थी मंगाई। वो बोली
अम्मा ने बाबू जी को है समझाया। बोल रही थीं क्या जी फटफटी देकर खांदान के
सामने नाक कटवा रहे, इकलौती बेटी की शादी में भी कंजूसी दिखा रहे। सब यही
कहेंगे। कार की जगह फटफटी में टरका दिया। सस्ते में अच्छे खासे लड़के को
फंसा लिया।
ये बात सुनकर अन्नू भइया को बड़ा गुस्सा आया और अपने दोस्तों की महफिल की ओर बढ़े। और वहीं बोले....
भइया
का बताएं बड़ी राहे ससुर जी से आस। हम अपनी एक इच्छा पूरी करने गए राहें
उनके पास। पर का बताई उन्हें हमारी नहीं हमरी सास की ज्यादा समझ आई बात। और
हमरी टूट गई आस।
एक तरफ अपने मित्र पर गुस्सा रहे थे और खुद को कोस भी रहे थे।
मान जाते चाचा की बात तो आ जाती उसी समय बुलेट, अभी कही भी जा रहे होते
फटाफट। पर अब पछताए होत क्या जब चि़ड़िया चुग गई खेत। क्योंकि अब चाचा तो
देंगे नहीं पैसा। भले ही चलें कार से स्टेयरिंग होगी उनकी पत्नी के हाथ।
अब तो बेचारे अन्नू भइया को फटफटी कभी मिलेगी कि नहीं पता नहीं।
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